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आरक्षण और गणतंत्र भारत | Thoughts About Against Reservation In India

सन् 1950 में जब देश को नया संविधान मिला, तो हमें democraticदेश कहा गया परन्तु उसका वास्तविक मूल्य समझना हमारे लिए बेहद मुश्किल रहा है और समाज के सामने प्रकट नहीं हो पाया।

इसमें कोई दो राय नहीं कि संविधान निर्माणक स्वर्गीय डॉ भीम राव अंबेडकर जी ने भारत को एक ऐसी सौगात भेंट दी जिसने न केवल भारत को ढाचांगत बल्कि, भारत के हर एक मूल निवासी का स्वयं दर्पण कराया, आज हर भारतीय गणतंत्र हैं, अपने जीवन का निर्णायक है। बच्चे से बूढ़े, पुरुष एवं महिला हर व्यक्ति का मूल आधार संविधान ही संजोये बैठे है। मूल रूप से इसका संस्थापक मानवतंत्र ही है।

against reservation


यदि इसके मूल आधारों की बात हो ही रही है तो संविधान का दूसरा पहलू भी सामने आना जरूरी हैऔर अगर इस पहलू को गौर से समझा जाये तो संविधान की नींव तो मजबूत दिखती है परन्तु समाज के लिए बने एक समान अधिकारों का उल्लंघन भी होता हुआ दिखाई देता है। जहाँ हम बात करते हैं भारतीयों को आंतरिक रूप से जोड़ने की वही देश के मूलनिवासियों को वर्गों का अंतर अधिकारों के हनन हेतु काफ़ी हैं। बात करें तो सामान्य वर्ग और पिछड़ा वर्ग जिसे हम ST,SCके नाम से जानते हैंये अंतर संविधान नामक ग्रन्थ में फलित ही नहीं होना चाहिएक्योंकि ऐसे अंतर गणतंत्र समाज की नींव को हिला सकते हैं। एक वर्ग को तो प्रावधानिक रूप से अधिकार प्राप्त हैं परन्तु दूसरे वर्ग के अधिकारों का हनन एक विग्रह समाज को प्रकट करता है। और यह स्पष्ट रूप दिखता है कि हम अपने संविधान के प्रति कितने सृजग हैं।

हमें संविधानिक रूप से सुस्पष्ट होने की अति आवश्यकता है, और एक बुनियादी ढाँचा पारित करने की अति आवश्यकता हैक्योंकि आज के समाज में हर एक व्यक्ति अपने अधिकारों और अस्तित्व को लेकर विशेष रूप से सृजग है,ऐसे में गणतंत्र मूलाधिकारों को असामान्य रूप से त्वरित करना हितकारी  नहीं होगा। और इस कहना भी गलत नहीं होगा, कि जहाँ हम बात करते हैं समाज में एकता लेन की ,वही हमारे राजनीतिक मसले,समाज की एकता को भंग करने में पीछे नहीं हैं, वह हमें पूर्ण रूप से विग्रह करने का काम कर रहे हैं। आज भले ही ही हम आधुनिक बन गए हों परन्तु जाति,लिंग, अमीरी-गरीबी जैसे भेद-भावों को समाज से हटा पाना बेहद मुश्किल काम होगा।

हम अपने आप को एक ऐसे समाज का हिस्सा पाते हैं,  जहाँ समुदाय, जाति, लिंग, आदि जैसे आधारों के बल पर जनों को विभाजित कर एक अंतर की बुनियाद बनाई जाती है, जिसके कारण हम एक होकर भी अलग-अलग हैं। इसका उदाहरण देखा जाये तो शिक्षा,रोजगार आदि के क्षेत्रों में वर्गों के आधार पर भेद भाव सामान्य रूप से प्रदर्शित है। आरक्षण के होते सामान्य वर्ग और ST, SC कभी भी एक सामान अधिकार प्राप्त नहीं कर सकेंगे ,क्योंकि चाहे सरकारी नौकरियाँ हों या ट्रेन में रिजर्वेशन सब आरक्षण के बल पर ही चल रहे हैं। जब आरक्षण की प्रक्रिया को तैयार किया गया तो उसका समय काल सिर्फ 10 वर्षों का था अर्थात उसका उद्देश्य केवल इतना ही था की पिछड़े वर्गों को आगे लाना और सामान अधिकारों को मजबूती प्रदान करना । लेकिन इससे विचार से अलग हटकर लोगों ने अपने राजनीति और व्यक्तिगत स्वार्थ के चलते इसे जीवन का हिस्सा बना लिया जिसने न केवल संविधान की बुनियादी रचना को ठेस पहुँचाई बल्कि उसकी अवहेलना का एक स्रोत भी बना।

अतः आज के युग के एक सृजग एवं निष्ठावान होने के नाते हमें अपने अथवा दूसरों के अधिकारों का हनन नहीं होने देना हैऔर अपने संविधान की प्रतिष्ठा के संरक्षण के लिए ऐसे प्रावधानों को रद्द करना चाहिएऔर इन जातिगत आरक्षण का समर्थन करने वालों के लिए सख्त से सख़्त कानून बनाने होंगे। जिससे इस रूढ़ीवादी मानसिकता पर विराम लगे और एक ऐसे भारत का निर्माण हो जहाँ समान जीवन यापन किया जा सके।

नशा एक व्यसन | A Lesson For Drug Addict Persons

नशीले पदार्थों का व्यसन एक सामाजिक बुराई का रूप ले चुका है एक सर्वेक्षण के अनुसार लगभग 90 प्रतिशत युवा वर्ग किसी न किसी रूप में इन नशीले पदार्थों का उपयोग कर रहा है चाहे इन नशीले पदार्थों का स्वरुप भिन्न-भिन्न ही क्यों न हो जैसे कोई शराब पीता है तो कोई पान मसाला खाता है तो कोई गांजा या भांग का सेवन करता है इन सभी का रूप तो अलग अलग होता है किन्तु इन सभी बुराइयों का परिणाम एक ही  है और वह है उस व्यक्ति का जीवन अंधकारमय होना |


nasha karne se kaise bachen


मधपान को यदि सरकार के द्वारा Ban कर दिया जाये तो इस देश में बढ़ रहे अपराधों को काफी हद तक काबू में लाया जा सकता है क्योंकि मधपान के बाद ही व्यक्ति बुरे कार्यों को करने के लिए प्रेरित होता है अतः इस सामाजिक बुराई को खत्म करने में ही समाज का उत्थान संभव है |

मधपान के प्रयोग से समाज में कुकृत्यों को प्रोत्साहन मिल रहा है चोरी, मारपीट यहाँ तक की हत्या जैसी घटनाओं में तेजी से वृद्धि हो रही है | आज समाज में मधपान ही एक सामाजिक समस्या नहीं है वल्कि अन्य नशीले द्रव्यों जैसे- अफीम, चरस, कोकीन, भांग तथा अन्य नशा उत्पन्न करने वाली दवायें व जड़ी बूटियाँ इत्यादि का प्रयोग इतनी अधिक मात्रा में होने लगा है कि प्रत्येक समाज में मादक द्रव्य व्यसन एक चिंता का विषय बना हुआ है प्रायः ऐसा देखा गया है कि एक बार इस प्रकार के मादक पदार्थों के व्यसन की व्यक्ति को आदत पड़ जाती है तो उसे छोड़ना बहुत मुश्किल हो जाता है | पिछले कुछ समय से इसका प्रचलन काफी बढ़ गया है|

नशीले पदार्थों में Maarfeen,Afeem,Paithedeen,Heroine,Kokin आदि को भी सम्मिलित किया जाता है अब इसमें Ismaaik भी जुड़ गया है | इसके प्रयोग से युवाओं में अपराध बोध की भावना का जन्म तेजी से हो रहा है |

भारत में मधपान और नशीले पदार्थों का व्यसन प्राचीन समय से चला आ रहा है,तम्बाकू पीने का रिवाज़ बहुत पुराना है| ये पता लगाना बहुत ही कठिन है कि इसकी शुरुआत कहाँ हुई व कब हुई | आजकल तम्बाकू का प्रयोग हुक्का,सिगार,सिगरेट,बीड़ी आदि के रूप में होता है |

धूम्रपान एवं मधपान को छूत की बीमारी भी कहा जाता है Because व्यसन करने की इच्छा का उदय तभी और वहीँ से होता है जब नशा करने वाले इसके लाभों का बढ़ा-चढ़ा कर गुणगान करने लगते हैं |

मधपान का सेवन जो व्यक्ति करता है वह उसके परिवार और व्यापक रूप से समाज के लिये भी हानिप्रद है | नशे की आदत कभी-कभी या लगातार नशा करने से पड़ती है | शराब का नशा बहुत तेज होता है शराब और दूसरे प्रकार के नशों का प्रभाव और इससे उत्पन्न विघटन लगभग एक सा ही होता है |

मधपान और मादक पदार्थों के व्यसन की समस्या में काफी समानता है दोनों में अल्पकालिक सुखद मनोदशा उत्पन्न करने के लिए मूलतः रासायनिक वस्तुओं का आदतन प्रयोग किया जाता है |

अतः समाज के सभी सदस्यों से मेरी गुजारिश है कि कभी किसी प्रकार के व्यसन का प्रयोग न करें खुद खुश रहें व दूसरों को भी खुश होने का मौका दें |  

क्या है मानव | A Poem On Real Human Life In Hindi

मानव का जीवन संघर्षों से भरा हुआ है | इस संसार में जन्में हुए हर प्राणी को कठिनाईयों से गुजरना पड़ता है | हमें क्या करना है और कैसे करना है यही हमारे जीवन की परीक्षा है |इस छोटी सी कविता के माध्यम से मैं आप लोगों को यह अवगत कराना चाहती हूँ कि संघर्ष ही जीवन है |

what is a humen



मानव भी क्या मानव है,
खुद ही संभालता अपना जीवन है |
दुखों से भरा उसका यौवन है,
कष्ट झेलता वो मन जौहर है |

संताप नहीं उसके मन में,
चेहरा तम से है भिचा हुआ
जीने की लालसा के भय से
दुनियां से आज अभीप्सित हुआ |

जीवन की मधुशाला में,
अनगिनत कोपल है खिले हुए |
इस सिन्धु की चौपाटी में
धवल दीप हैं सजे हुए
अमोल है पर  लाचार है
पर क्या करें बेसहारा आज कारगुजार है |

आँखे धसीं महिमा गाती
पर ईश्वर का शुक्र अदाकार है |
प्रज्वलित मन वो संतोषी है
नहीं दाना वरन कोशी है
भेंट बांटता औरों को
पर उसका जीवन परितोषी है,
यही अनन्य भक्त ईश्वर का,
फूल कांटे बांटता हुआ,
झुकी कमर बादल बरसाता
दुनियां से आज निष्कासित हुआ |

रिश्तों की टूटती हुई डोर | Personal Thoughts For Better Relation

आज के भागदौड़ भरे जीवन ने रिश्तों की अहमियत को खो दिया है चाहें वो माता पिता हों , भाई बहन हों , दोस्त हों , पडोसी हों किसी के पास एक दूसरे के लिए वक़्त नहीं है इंसान को आज के दौर में चारो तरफ पैसा ही पैसा नजर आ रहा है कैसे पैसा कमायें और कैसे शानदार जीवन यापन करें रिश्ते एक कोने में पड़े करवट ले रहे हैं |


rishton ki dor how to make relations better


दुनियां के सभी रिश्तों में सबसे ज्यादा मजबूत कहा जाने वाला रिश्ता है माँ-पिता और संतान का , लेकिन बड़े दुःख की बात है कि आज के समय में यही रिश्ता सागर की गर्त में पड़ा गोते खा रहा है | क्यों अपनी जन्मी हुई औलाद मजबूर कर रही है हर तरह से अपने माँ-बाप को , क्या असल जीवन में यही उनके जीनें की परीक्षा है |

माँ-पिता अपनी संतान को जिस निस्वार्थ भाव से प्रेम करते हैं वही रिश्ता बच्चों के लिए स्वार्थ परक बना हुआ है | माँ जिसने हमें नौ महीने गर्भ में रख कर भयंकर दर्द सहकर जन्म दिया है और बाप जिसने संतान के होते ही अपने शौकों को दफ़न कर औलाद का पालन पोषण किया | माँ-बाप जिन्होनें १० -१० बच्चो का पालन पोषण अभाव में, खुद चक्की चलाकर , आटा पीसकर , खुद भूखे रहकर कर लिया लेकिन वही १० बच्चे मिलकर अपने बूढ़े माँ-बाप को आज के समय में पैसा शोहरत और दौलत होते हुए भी भूखा मरनें पर विवश कर रहे हैं-ऐसा क्योँ |

हम बदल गए, दुनियां बदल गयी या फिर हमारे आस पास के वातावरण ने हमको ऐसा करने पर मजबूर कर दिया है | क्या कभी सोचा है या मन में विचार किया है कि हमारे परिवार के रिश्तों की डोर क्योँ इतनी कमजोर होती जा रही है, क्या हम अपने आस पास के वातावरण को देखकर वैसे ही बन जायंगे| यदि हम वास्तव में अपने रिश्तों में सुधार लाना चाहते हैं तो अपनी वाणी में मिठास और संयम बनाए रखें | 

हमारे माँ बाप या परिवार के अन्य सदस्यों को कोई चीज सबसे ज्यादा परेशान करती है तो वो है शब्द रुपी बाण | हम अपने शब्दों की कड़वाहट से परिवार के किसी भी सदस्य का मन आहत ना करें व उनकी दुखती हुई रगों को कभी ठेस न पहुचाने की कोशिश करें | हमारी हमारे परिवार के प्रति ये नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि हम उनकी छोटी या बड़ी हर जरूरत का ध्यान रखें ,उनसे विचार-विमर्श करें, उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखें तथा उन्हें मानसिक पीड़ा न दे | रिश्ते ही हमें कामयाबी की राह दिखाते हैं, रिश्तों से ही हमारा अस्तित्व है व रिश्ते ही हमें जाने-अनजाने में हुई गलतियों का अहसास कराते हैं |

रिश्तों में ग़लतफ़हमी कभी आड़े हाथों न आने दें ग़लतफ़हमियाँ ही हमारे बीच कड़वाहट पैदा करती हैं | हमारे अच्छे संबंधों को समाज की नजर न लगे ऐसा हमें हमेशा प्रयास करते रहना चाहिए , ऐसा करने से हमारे परिवार की खुशियाँ कई  गुना बढ़ जाती हैं |

मन को शांत करने के लिए कुछ विचार हिंदी में | Hindi Vichar

मन चंचल होता है, और मन दुखी भी होता है, लेकिन यदि यह दुखी ही रहेगा तो इसकी चंचलता नष्ट हो जाएगी और जीवन में केवल नीरसता ही रह जाएगी | मन को शुद्ध और शांत रखने से ही लाभ है , इसे शांत रखिये और जीवन में उमंग लायें| इसीलिए आज मैं आपके लिए कुछ हिंदी विचार लेकर आया हूँ जो आपके मन को सदा खुश रखेंगे और इसे शांत रखेंगे  क्योकि मन ही जीवन जीने का आधार है , अगर यह सुप्त है तो आप कुछ नहीं और अगर यह कार्य कर रहा है तो आप सब कुछ हैं | विचारो को शुद्ध , मन को शांत और नियति पर अंकुश अत्यंत आवश्यक है|


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  • होंठों पर मुस्कान हर काम को आसान कर देती है|
  • यदि कल भूल से कोई काम गलत हो गया, तो आज उसके बारे में सोचकर अपने आज को बर्बाद न करें|
  • जीवन एक नाटक है अगर हम इसके कथानक को समझ लें तो जीवन जीना आसान है|
  • दूसरो को ख़ुशी देने से बड़ा दान नहीं है|
  • आलस्य सबसे बड़ा दुश्मन है, जो प्रसन्न रहते हैं उनके मन में आलस्य नहीं आता है|
  • कुछ लोग आपसे लड़ना चाहते हों तो आपके सदा दो शास्त्रों की ज़रुरत है 1) मुस्कान  2) स्नेहयुक्त व्यव्हार |
  • आपके मुस्कुराने से केवल आपको ही ख़ुशी नहीं मिलती जबकि आपके सामने बैठे उदास व्यक्ति को जीने की आशा की किरण मिलती है|
  • आपकी इन्द्रियों पर सम्पूर्ण नियंत्रण ही सबसे बड़ी विजय है|
  • यदि जीवन भर खुश रहना चाहते हैं तो आपकी इच्छाए सीमा के बहार न जाने पायें|
  • यदि आपको कुछ पाने की छह थी परन्तु किसी कारणबश आपको नहीं मिल पाई, तो समझिये वह आपके हित में नहीं थी|
  • जो अपने को हर परिस्थिति में ढलता है तो समझिये उसे जीवन जीने की कला आ गयी|
  • अगर हर संभव प्रयास से भी सफलता न मिले तो अपने परमात्मा पर छोड़ दे, निश्चित ही होगा|
  • यदि सभी आपके विपरीत हैं तो उदास न हो आपके साथ संसार की सबसे बड़ी शक्ति है और वो है परमात्मा|
  • अकेलापन आपको सताता है जब आप भूल जाते हैं की परमपिता परमात्मा आपके परम मित्र हैं|
  • सुख और दुःख में किसी का साथ न मिले तो भगवान को हमेशा सामिल कर लें |

ऊपर दिए गए विचार निश्चित ही आपके डगमगाते मन को शांत रखेंगे साथ ही आपको शक्ति प्रदान करेंगे| इन हिंदी विचारों से आपके मन को शुद्ध करने में मेरा प्रयास आपको पसंद आया हो तो दूसरो को भी इसे share करके बताये| 


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बेटी की बिदाई | An Emotional Poem | Poem On Vidayi

माँ बेटी को जन्म देती है,पालपोश कर बड़ा करती है लेकिन उसका ममतामयी हृदय काँप जाता है जब वह अपनी बेटी को ससुराल भेजकर खुद से अलग करती है |ये शब्द एक माँ हृदय से निकली हुई आवाज है,जो अपनी बेटी की शादी करने से पहले सोचती है |माँ बेटी के बचपन से लेकर हर एक गुजरे पल को याद कर बिलख-बिलख कर रोती है कि वह कैसे अपनी बेटी को विदा करेगी | अंततः,वह घड़ी भी आ जाती है,पहले तो उसका मन काँप जाता है लेकिन बाद में अपनी अन्तरात्मा की आवाज सुनकर वह अपना दिल हल्का कर लेती है और अपने संस्कारों के बल पर बेटी को दो परिवारों की बागडोर संभालने के लिये प्रोत्साहित करती है |


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माँ की ममता के आँचल में,
बेटी ने सहेजे वो दो पल ,
कर सूना उस आँचल को ,
आज वो ससुराल चली |

ममता रोई ,आँचल रोया ,
खेली–पली जिस घर में ,
था उस दिन ,
वो आँगन रोया |

मेहँदी लगी है हाथों में ,
करवा रही, मन में अहसास ,
कल छोड़ तुम्हें सब जाना है ,
माँ-पिता,घर,देहरी और ये द्वार |

माँ के कलेज़े के टुकड़े को ,
कल पराया हो जाना है ,
मन में खटकती यह बात,
इसलिए रहता है मेरा मन उदास |

बेटी पराई होती है ,
आज समझ आया मुझे ,
क्यों कहता है,
सारा ब्रम्हांड |

ढोल-नगाड़े बज रहे ,
ढोलक की थाप गूँज रही ,
शहनाई आँगन में बज रही ,
पर ममता का आँचल कचोट रहा |

कल बेटी चली जाएगी ,
कैसे सहूँ इस दर्द को ,
है दिल मन ही मन रो रहा |

दिल दहलाता यह एहसास ,
आज है जो मेरी आन ,
कल बन जायेगी ,
मेरा छोड़ दूसरे की शान |

चलने को जब होती उद्यत ,
मैं ऐसे ठिठुर जाती ,
जैसे सर्द हवाएं जाड़ो में ,
हाड़-मॉस सब कंपा जाती |

कल बेटी विदा हो जाएगी ,
ये घर आँगन छोड़ जायेगी ,
आँखों से ओझल होता देख ,
ममता ने मुझे झकझोर दिया |

कर दो विदा तुम बेटी को ,
कुछ मान-मर्यादा उसे सिखा देना ,
जाकर तुम अपने उस घर में ,
फूलों के गुल खिला देना |

सास-ससुर हैं माता-पिता ,
देवर ही तुम्हारा भाई है ,
ननद ही तुम्हारी बहना है ,
ऐसा उसको सिखला देना |

करके सम्मान तुम उन सबका ,
खुद अपना मान बढ़ाओगी ,
उनकी बगिया को फलता देख ,
उस दिन से बहू नहीं, बेटी कहलाओगी |

दो परिवारों की बागडोर ,
अच्छे से तुम्हें संभालनी है ,
हमारे संस्कारों की सीख से ,
तुम्हें शान अपनी बढ़ानी है |

ममता की इस आवाज ने ,
मेरे मन को आज तसल्ली दी ,
कर दूँगी बेटी विदा मैं ,
ह्रदय कठोर बना लूंगी |

अपनी छाया से जिसे मैंने ,
पालपोष कर बड़ा किया ,
आँखों में आँसू भरकर के ,
मैंने आज उसे विदा किया |


BSNL के 2 नए मिनट प्लान | जाने क्या है इसमें

Competition के इस दौर में सभी jio को पीछे करने की सोच रहे हैं | लेकिन ये कोई नहीं सोचता जो FREE में सब कुछ दे रहा हो उससे कैसा competition, लेकिन  फिर भी कुछ companies अपनी हरकत से बाज़ नहीं आ रहीं हैं, उनमे से एक है BSNL | BSNL एक सरकारी कंपनी है जो इस समय jio को पीछे करने के लिए रोज़ कोई न कोई प्लान लेकर आ रही है लेकिन उसकी दाल नहीं गल पाती| इसबार भी BSNL अपने नए व् पुराने ग्राहकों के लिए 2 मिनट प्लान लेकर आई है चलिए डालते हैं नज़र इस प्लान पर और देखते हैं क्या है इस प्लान की खासियत|



"बगुला चले हंस की चाल" ये कहावत तो आपने सुनी ही होगी| यहाँ bsnl है बगुला और हंस है jio . बात दरअसल ये है bsnl अपनी लाख कोशिशे कर रहा है की ग्राहक उसे मिले और जो अभी हैं वो jio के पास न जाएँ| तो इस लिए bsnl ने 2 मिनट पैक निकाले हैं जिसमे ग्राहकों को भरपूर बात करने का मुका मिल रहा है| एक plan है 149 Rupee का और दूसरा है 439 rupee का|


BSNL 149 Plan:
Price - 149 Rupee
Minute - 30 minute / Day
Validity - 30 Days



BSNL 439 Plan:
Price - 439 Rupee
Minute - 30 minute / Day
Validity - 90 Days



नोट: अगर आप 30 मिनट के बाद और मिनट उसे करेंगे तो आपको 80 पैसा / मिनट देना होगा|


मेरा सुझाव :

अगर आप दिन भर में 30 मिनट उसे कर सकते हैं या उससे कम उसे करते हैं तो आपको यह प्लान उसे करना चाहिए| क्यों कि अगर आप 151 मिनट प्लान उसे कर रहे हैं तो मौजूदा समय में इसमें 350 मिनट मिलते हैं| जब कि इस प्लान के हिसाब से आप 30x30 = 900 मिनट पाएंगे | जो की लगभग 3 गुना है| 

मैंने यह प्लान 24 january 2017 को कस्टमर केयर पर बात करके conform किया था | लेकिन मैं आपको फिर भी सलाह देता हूँ की इसे करने से पहले 1503 पर कॉल करके इसे conform कर लें | jio के साथ जो भी टक्कर लेगा , तो इससे ग्राहकों को ही फायदा होगा | तो इसी बात से jio रहो|

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