नशीले पदार्थों का व्यसन एक सामाजिक बुराई का रूप ले चुका है एक सर्वेक्षण के
अनुसार लगभग 90 प्रतिशत युवा वर्ग
किसी न किसी रूप में इन नशीले पदार्थों का उपयोग कर रहा है चाहे इन नशीले पदार्थों
का स्वरुप भिन्न-भिन्न ही क्यों न हो जैसे कोई शराब पीता है तो कोई पान मसाला खाता
है तो कोई गांजा या भांग का सेवन करता है इन सभी का रूप तो अलग अलग होता है किन्तु
इन सभी बुराइयों का परिणाम एक ही है और वह
है उस व्यक्ति का जीवन अंधकारमय होना |
मधपान को यदि सरकार के द्वारा Ban कर दिया जाये तो इस देश में बढ़ रहे अपराधों
को काफी हद तक काबू में लाया जा सकता है क्योंकि मधपान के बाद ही व्यक्ति बुरे
कार्यों को करने के लिए प्रेरित होता है अतः इस सामाजिक बुराई को खत्म करने में ही
समाज का उत्थान संभव है |
मधपान के प्रयोग से समाज में कुकृत्यों को प्रोत्साहन मिल रहा है चोरी, मारपीट
यहाँ तक की हत्या जैसी घटनाओं में तेजी से वृद्धि हो रही है | आज समाज में मधपान
ही एक सामाजिक समस्या नहीं है वल्कि अन्य नशीले द्रव्यों जैसे- अफीम, चरस, कोकीन, भांग
तथा अन्य नशा उत्पन्न करने वाली दवायें व जड़ी बूटियाँ इत्यादि का प्रयोग इतनी अधिक
मात्रा में होने लगा है कि प्रत्येक समाज में मादक द्रव्य व्यसन एक चिंता का विषय
बना हुआ है प्रायः ऐसा देखा गया है कि एक बार इस प्रकार के मादक पदार्थों के व्यसन
की व्यक्ति को आदत पड़ जाती है तो उसे छोड़ना बहुत मुश्किल हो जाता है | पिछले कुछ
समय से इसका प्रचलन काफी बढ़ गया है|
नशीले पदार्थों में Maarfeen,Afeem,Paithedeen,Heroine,Kokin आदि को भी
सम्मिलित किया जाता है अब इसमें Ismaaik भी जुड़ गया है | इसके प्रयोग से युवाओं
में अपराध बोध की भावना का जन्म तेजी से हो रहा है |
भारत में मधपान और नशीले पदार्थों का व्यसन प्राचीन समय से चला आ रहा है,तम्बाकू
पीने का रिवाज़ बहुत पुराना है| ये पता लगाना बहुत ही कठिन है कि इसकी शुरुआत कहाँ
हुई व कब हुई | आजकल तम्बाकू का प्रयोग हुक्का,सिगार,सिगरेट,बीड़ी आदि के रूप में
होता है |
धूम्रपान एवं मधपान को छूत की बीमारी भी कहा जाता है Because व्यसन करने की
इच्छा का उदय तभी और वहीँ से होता है जब नशा करने वाले इसके लाभों का बढ़ा-चढ़ा कर
गुणगान करने लगते हैं |
मधपान का सेवन जो व्यक्ति करता है वह उसके परिवार और व्यापक रूप से समाज के
लिये भी हानिप्रद है | नशे की आदत कभी-कभी या लगातार नशा करने से पड़ती है | शराब
का नशा बहुत तेज होता है शराब और दूसरे प्रकार के नशों का प्रभाव और इससे उत्पन्न
विघटन लगभग एक सा ही होता है |
मधपान और मादक पदार्थों के व्यसन की समस्या में काफी समानता है दोनों में
अल्पकालिक सुखद मनोदशा उत्पन्न करने के लिए मूलतः रासायनिक वस्तुओं का आदतन प्रयोग
किया जाता है |
अतः समाज के सभी सदस्यों से मेरी गुजारिश है कि कभी किसी प्रकार के व्यसन का
प्रयोग न करें खुद खुश रहें व दूसरों को भी खुश होने का मौका दें |

