मर्द का दर्द | डीएम मुकेश पाण्डेय की आत्महत्या पर मंथन | Dm Mukesh Pandey Suicide Note
डीएम मुकेश पांडे एक सीधा साधा सरल इंसान,जिसने अपने घेरलू
परेशानियों के चलते ट्रैन के ट्रैक से कट कर खुदखुशी कर ली। खुदखुशी करने
से पहले उन्होंने बाकायदा अपना वीडियो बनाया जिसमे उन्होंने अपनी परेशानी
साझा की, पारिवारिक झगड़ो के चलते यह इंसान बेतहाशा दुखी हो गया था,
उन्होंने ये कहा अति हर चीज़ की बुरी है, रोज रोज के झगड़ो से तंग आकर इस
इंसान को आत्महत्या एक बेहतर उपाय लगा।
सवाल ये है कि
लोग एक मर्द का दर्द क्यों नही समझते। इंटरनेट पर सोशल मीडिया पर लोग मुकेश
को एक कायर इंसान बता रहे है, पर उस इंसान ने किन परिस्थितियों में ये कदम
उठाया ये कोई क्यों नही समझता।
अक्सर बीवी और माँ बाप के झगड़े में बिचारा फसता मर्द ही है, बीवी की सुने तो जोरू का गुलाम, माँ बाप की सुने तो बीवी के ताने।
"तुम्हे तो अपने माँ बाप ही सही लगते है, अगर ऐसा ही करना था तो शादी क्यों की""तुमसे शादी कर के मेरी जिंदगी बर्बाद हो गयी है""बेटा तूने ही इसे माथे पर चढ़ा रखा है""हां हा अब तो तू इसी की सुनेगा, माँ बाप ने किया क्या है तेरे लिए"
इसमे
कोई शक नही कि इमोशनल अत्याचार मर्द पर होता ही है। औरतो की खूबी है कि वो
रो धोकर अपना दर्द हल्का कर लेती है, पर बिचारा मर्द वो कहाँ जाए।
जरूरी
नही विक्टिम हमेशा महिला ही हो, महिलाओ के साथ पुरुषो को भी अपनी जिंदगी
में बहुत सारे sacrifice करने पड़ते है, शायद वो इसे ढिंढोरा पीट कर बता नही
सकते।
हम कौन होते है उस इंसान को कायर बोलने वाले जब हम उसकी मनोदशा नही समझ सकते।
एक
बार इत्मिनान से बैठिये और सोचिये क्या बलिदान हमेशा महिलाये ही देती है,
पुरुष भी तो उनसे कंधा मिलाकर चलता है, वो भी तो उसका सुख दुख का साथी होता
है तो समाज की उंगलियां पुरुषो पर क्यों उठती है, कि इसे देखो एक औरत को
नही संभाल पाया।
कैसी मानसिकता है?एक बार विचार जरूर करे, आखिर मर्द को भी दर्द होता है।
Article By:
डॉ शिल्पा जैन सुराणा
PhD M.Phil MBA
वारंगल
तेलंगाना

