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मंजिल कामयाबी की | A Motivational short story

सफल व्यक्ति के पीछे असफलता का दर्द छिपा होता है यही असफलता का मुकाम आगे चलकर सफलता के दरवाजे खोलता है |यह एक ऐसे इन्सान की दास्ताँ है जिसने सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़कर एक ऐसा मुकाम हासिल किया जहाँ पहुंचना आसान नहीं होता, यदि हमारा लक्ष्य निश्चित है तो कामयाबी की मंजिल दूर नहीं होती |

मंजिल कामयाबी की manzil kamyabi ki - a motivational story


एक गाँव में एक लड़का था उसके तीन भाई थे अपने तीनों भाइयों में प्रतीक सबसे छोटा था बड़ा भाई खेती करता था दूसरा भाई गाँव-गाँव में फेरी लगाकर परिवार का पालन पोषण करता था और तीसरा भाई पढाई कर रहा था | तीनों भाइयों में बहुत ही प्यार था, दोनों बड़े भाई कमाकर के अपने छोटे भाई को पढ़ा रहे थे | वो चाहते थे कि हमारा भाई हम लोगो की तरह न बनकर एक अच्छी सरकारी नौकरी करे और शहर में घर बसाये |
जब प्रतीक चार साल का था तब उसकी माँ का और कुछ समय बाद उसके पिता का देहांत हो गया था | दोनों बड़े भाइयों ने मिलकर के माँ और बाप दोनों का फ़र्ज़ अदा किया | उसे किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं होने दी |प्रतीक ने बीएससी और एमएससी की पढाई करके एसएससी की तैयारी की ओर कदम बढ़ाये |

परिवार के सभी लोग अशिक्षित थे इसलिए उचित मार्गदर्शन की कमी उसे खल रही थी| सबसे पहले प्रतीक ने क्लर्क की भर्ती परीक्षा लखनऊ में जाकर दी | जब वह परीक्षा कक्ष से वापस लौट रहा था तो उसकी मुलाकात एक ऐसे शख्स से हुई जो देखने में तो बहुत रौबीला और कठोर मालूम पड़ता था लेकिन बातचीत से ऐसा लगा की जैसे वह अत्यंत नरम ह्रदय वाला व्यक्ति हो |उसने मुझसे कई मुद्दों पर बात की और परीक्षा कैसी हुई बेटा यह बड़े प्यार से पूंछा |

मैंने उन्हें कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया क्यूंकि यह मेरी पहली प्रतियोगी परीक्षा थी जो मैंने उचित मार्गदर्शन के अभाव में दी थी |पता नहीं क्यों,इस शख्स से बातचीत करके मुझे ऐसा लगा जैसे अब कामयाबी की मंजिल मुझसे ज्यादा दूर नहीं है | मैं अपने भाइयों के सपनों को तोड़ना नहीं चाहता था वरन साकार करना चाहता था |

केंद्र से बाहर निकलकर वह मुझे अपनीं गाड़ी में बैठाकर अपने घर ले गये और चाय-पानी कराया और बाद में  खाना खिलाया और फिर कहा “बेटा तुम बहुत थक गये होगे जाओ कमरे में जाकर थोड़ी देर आराम कर लो ‘’| लेकिन मुझे नींद कहाँ आने वाली थी मैं तो दी हुई परीक्षा के हल के बारे में सोच रहा था |क्यों मेरा पेपर खराब हो गया,क्या मैं अपने भाइयों की कसौटी पर खरा नहीं उतर पाउँगा | इसी उधेड़ बुन में मैं अधजगा सा बेड पर लेटा हुआ था कि एकाएक दरवाजे की कुण्डी बजी ,मैं सहम सा गया देखा वही देवता समान शख्स मेरे सामने खड़े थे ,उन्हें मेरी नब्ज टटोलने में जरा भी देर नहीं लगी कि मैं इस बक्त क्या सोच रहा हूँ | वह आकर मेरे पास बैठ गये ,पीठ पर हाथ फिराया और बोले बेटा डरो मत,इस परीक्षा में यदि तुम्हें असफलता मिलती है तो यही असफलता तुम्हें आगे चलकर सफलता के कदम चूमनें के लिए प्रोत्साहित करेगी |

इस परीक्षा का परिणाम लगभग दो महीने बाद घोषित हुआ लेकिन मैं असफल हो गया | मैं बिल्कुल निराश नहीं हुआ  बल्कि इसी सोच के साथ असफलता ही हमे सिखाती है ,दिन –दूनी रात चौगुनी मेहनत करना शुरू कर दिया |कुछ समय बाद एस .बी .आई. के क्लर्क पद के लिए परीक्षा दी और इस बार मैं सफल हो गया |

क्लर्क पद पाकर के मेरे भाइयों को तो अपार ख़ुशी मिली लेकिन मुझे मानसिक संतुष्टि नहीं मिली |अपने भाइयों के कहने पर मैंने bank में join कर लिया |पर ना जाने क्यूँ मेरा मन bank में नौकरी पाकर के खुश नहीं था | मैंने मन ही मन दृढ निश्चय किया कि इस औसत दर्जे की नौकरी को छोड़कर कठिन परिश्रम द्वारा मैं उच्च दर्जे की नौकरी प्राप्त करके रहूँगा | सारे दिन bank में duty करने के बाद रात को आकर मैं आगे की परीक्षा की तैयारी में जुट जाता | ऐसे मैंने कई सरकारी नौकरियों के लिए apply किया ,सफलता अर्जित की पर मेरा मन तो सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़कर सबसे ऊपर की मंजिल पर पैर रखना चाहता था|


लगभग तीन साल बाद मैंने लोक सेवा आयोग की पी .सी .एस परीक्षा में एक विशेष rank के साथ सफलता प्राप्त की | अपने शुरूआती दौर में मैं भले ही असफल रहा था लेकिन यही असफलता का दर्द मेरे लिए सफलता का मुकाम बना |दोनों भाइयों के स्नेह ,लगन और सरकारी नौकरी दिलाने की निष्ठा ने मुझे मेरी मंजिल दिखाई |

अब आप भी बनें एक लेखक | GyaniTota करेगा आपका सपना पूरा

हम सभी में एक प्रतिभा छुपी होती है , जो भगवान हमें दूसरो से अलग बनाने के लिए देता है, मेरा मानना है कि बचपन से लेकर बुढ़ापे तक ये हमारे साथ रहती है| जो इसका प्रयोग करते हैं वो या तो अभिनेता, या गायक , या लेखक, या पत्रकार या कोई बड़ी हस्ती बन जाते हैं, और जो इसे छुपा कर रखते हैं वो इसे धीरे धीरे ख़तम कर देते हैं| खास तौर पर घरेलू महिलाओं के साथ ऐसा होता है , घर में काम करने के बाद थककर टी वी देखना ज्यादा अच्छा है वजह अपनी प्रतिभा को निखारने के, ऐसा आज कल की घरो में रहने वाली महिलाये करती हैं| अगर आप अपने दिन भर के कामों में 1 से 2 घंटे बचा ले और टीवी न देखे तो आप अपना सपना पूरा कर सकते हैं, क्यों की gyaniTota लाया है अब आपके लिए एक सुनहरा मौका|


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जो महिलाये कुछ जानती हैं, और उनके पास प्रतिभा भी है तो उनके पास कोई ऐसा Platform नहीं मिल पता जहाँ वो अपनी प्रतिभा दिखा सकें | तो ऐसे ही लोगो के लिए ज्ञानी तोता (Gyanitota) एक अवसर लेकर आया है| अगर आपमें प्रतिभा है तो हम आपके लिए माध्यम बनेंगे और आपकी प्रतिभा को दुनिया के सामने लेकर आयेंगे | तो आपको करना क्या है इसे समझिये और अपने लेखों को हमारे पास भेजिए |


आपको करना क्या है :

सबसे पहला काम है की आपको अपने लेख को हिंदी में word file में लिखना होगा और इसे व्यवस्थित तरीके से सजाकर एक फोटो के साथ rahuldeotiwari@gmail.com पर भेजना है| अपने लेख को ईमेल पर संलग्न करे और subject में Article का नाम लिखना है| लेख के साथ में अपना एक स्कैन किया हुआ पासपोर्ट साइज़ फोटो भी भेजे साथ में अपने बारे में 100 शब्दों में लिखें|


शर्ते:

आप अपना लेख gyanitota.com पर पब्लिश कर सकते हैं लेकिन आपको कुछ शर्तों को मानना होगा | शर्तें कुछ इस प्रकार हैं|


  • आपका लेख अपना खुद का लिखा हुआ होना चाहिए| आप कहीं से बस हिंट ले सकते हैं परन्तु शब्द आपके होने चाहिए|
  • आपका लेख एक कहानी, कविता, बायोग्राफी , इतिहास से जुडी जानकारी, राजनीति पर चर्चा, कंप्यूटर ज्ञान, तकनीकी संबंधी, मोबाइल की जानकारी, फिल्म का रिव्यु (Movie Review), हेल्थ से जुडी जानकारी, टिप्स एंड ट्रिक्स (Tips and Tricks) हो सकता है|
  • अगर आप कहीं और भी अपने लेखो को भेजते हैं तो आप gyanitota पर publish किये हुए articles को फिर कहीं और नहीं publish नहीं कर सकते हैं|
  • आपका आर्टिकल कम से कम 600 से 800 शब्दों का होना चाहिए इससे अधिक हैं तो और भी अच्छा है | कविता, टिप्स and ट्रिक्स के लेख 500 शब्दों के हो सकते हैं बाकि के सभी 600 या इससे अधिक होने चाहिए|
  • सभ्य और साधारण भाषा का प्रयोग करना है, बीच बीच में English के शब्दों का भी प्रयोग करे, जैसी आज कल की बोल चाल की भाषा है| केवल अच्छे लेखों को ही स्वीकार किया जायेगा|
  • आपको अपना लेख rahuldeotiwari@gmail.com पर भेजना है|



लेखों से कमाने का मौका:

अगर आपका लेख प्रसिद्द होता है तो हम आपको कमाने का भी मौका देंगें, आपको अपने लेख को वेबसाइट पर publish करना है फिर 2 महीने के बाद इसका response देखा जायेगा, अगर एक महीने में 50,000 (पचास हज़ार) लोग आपके आर्टिकल को देखते हैं तो आपको हर आर्टिकल के 500 रुपये दिए जायेंगे, या इससे अच्छा करने पर ज्यादा भी मिलेगा|

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एक साया गरीब का | Ek Saya Gareeb Ka | An Inspirational Hindi Short Stories

Dosto, Gyanitota me aapka swagat hai, aaj hum aapke liye ek inspirational short story lekar aaye hain, mera vishwas hai ki aapko ye zaroor pasand aayegi.



जीवन एक बढ़ता हुआ स्वरुप,बढती हुई राहें डगमगाते हुए कदम जाने कब थमकर अपनी मंजिल धीरे धीरे पार करने लगते हैं,न आखो में रोशनी है और ना कोई झलक बस बरसात की आंधी लिए तूफ़ान से लड़कर वही आदमी शान्तचित्त होकर खतरों से लड़ने के लिए बाहें तो समेटता है लेकिन न जाने क्यों चढ़ता हुआ अंधकार उन्हें लक्ष्य से रोक लेता है , लगाम लगा लेता है उन विशाल भुजाओ पर जिन्हें समेटता हुआ वह आगे बढ़ने की सोचता है |

अभागा सा वह जीवन हिचकिचाकर काँप जाता है चलते हुए कदमो को रोक देता है ऊपर मुख किये लाचार होकर कुछ सोचने लगता है यह जीवन कोई हरामखोर रईसजादा नहीं वरन उस गरीब माई का बेटा है जो दो जून की रोटी कमाकर खाती है इस दो जून की रोटी के लिए कोठी के मालिकों की हजारों जली कटी सुनकर अपने नहीं वरन जीवन का पेट भरती है| जब यह जीवन छोटा था तो शायद अपनी माँ की हर वास्तविकता से अनजान था |

इस गरीब माई की नन्ही सी जान को बीएस खाने खेलने से मतलब था और मस्त था ,कई बर्ष बीत गए उसने ये जानने की कोशिश तक नहीं की कि माँ उसका पेट किस तरह से भरती है |माँ ने भी उसे अपनी परेशानी से दूर रखा व कभी अवगत नहीं कराया | यह बूढ़ी माई अपने लाडले को बचपन से ही कठोरता पूर्वक यातनाओं से जूझने नहीं देना चाहती थी ,क्यों उसे डर लगता था उन अनबूझ पहेलियों से जो कभी-कभी सपनों में आकर उसे डराया करती थीं |

समय बढ़ने लगा, समय के साथ-साथ जीवन दिन पर दिन बड़ा होने लगा और अब समझदारी उसके दिमाग में घुसकर उसे कुछ सिखाने के लिए प्रेरित करने लगी| रोशन निगाहें हट्टा-कट्टा शरीर चाँद सा मुख सब कुछ तो था उसके पास यदि कमी थी तो सिर्फ पैसे की,सम्मान की और बिरादरी की| तसल्ली मिलती जब उसकी वही बूढ़ी माँ उसे ह्रदय से लिपटकर अपने आँचल में सहेज लेती किन्तु दुःख होता जब वही माँ आँचल में उसे छिपाए हुए विस्म्रतियों में तल्लीन हो जाती,कुछ कहना चाहती किन्तु मन गवाही नहीं देता की वह लाडले को परेशान करे |

यह जीवन बड़ा अजीब लगता है पर वह कर भी क्या सकता था| वह समाज से भिड़ने के लिए सीना फुलाता तो था लेकिन उसकी आर्थिक परिस्थितियां उसे मजबूर कर देतीं, क्यों आज पैसे और भ्रष्टाचार का बोलबाला है आज बिना लिए-दिए होता ही क्या है | गरीब आदमी ही बिकता है उसे खरीदने वाले समाज के बड़े आदमी , जमींदार , उद्योगपति और नेता हैं |बिना विरादरी के बिना पैसे के इस बालक का दुनियां में सहयोग करने वाला था ही कौन| इसके पास भण्डार नहीं था उस भ्रष्ट कमाई का जो वह दुनियां से लड़ने के लिए संगठन करता और खरीदता उन लोगों को जो पैसे के लिए अपना ईमान तक बेंच देते हैं |

 प्रातः काल सूरज उदय होता है और वह अपनी लालिमा से सारे जग को रोशन कर देता है | किरणें रवि के चारों ओर फैलकर अपने प्रकाश को बिखेर देती है ,केवल पृथ्वी पर नहीं वरन पृथ्वी पर रहनें वाले प्रत्येक सजीव और निर्जीव प्राणियों पर जो इस धरातल पर रहकर उदय होती लालिमा से कुछ सीखना संवरना चाहते हैं लेकिन अस्त होती हुई संध्या फिर उसके अंदर अभाव और निर्धनता के विचारों को भर देती है |

अभाव क्या उसके अंदर हर बस्तु का अभाव ही था ऐसे में खैर वह अपने आप को कैसे तसल्ली देता, कैसे यकीन कराता अपनी उस बूढ़ी माँ को जो उसके लिए एक सहारा और वह उसके लिए एक अंधे की लकड़ी के समान था |उसकी आँखों का चमकीला तारा था, वह १ तारा और अपनी बिरादरी का एकमात्र कुलदीपक जो दुनियां में रोशनी तो बिखेरना चाहता था लेकिन बाटी डालते ही लौ में घी सूख जाता था ऐसे में वह अपने को कुछ पल अपने को थका हुआ बोझिल इंसान और संसार के लिए खुद को एक कलंकित अभागा समझता | सहसा उसी पल वह पुनः अपनी सारी कमजोर शक्ति बटोरकर फिर उसी दुनिया में लग जाता है यह सोचकर इंसान को दीर्घ जीवन जीना है उसे आनंद को अपनाना ही होगा | फिर जीवन अपने तनाव को डोर कर थके हुए शरीर और अवयवो को ताज़गी देकर कुछ पल परिस्थितियों को समझता और फिर अपनी भावनाओं को और संवेगो को उत्तेजित कर अपना सब कुछ दांव पर लगाने के लिए तत्पर हो जाता है |

मंजार ,चमन ,घाटी सब खिले-खिले नजर आ रहे हैं | ढलती हुई संध्या ने अपना रुख बदल लिया है चारो ओर शांति ही शांति है | बस कहीं-कहीं पर उल्लुओं की आवाज शंकालु प्रतीत हो रही है | आसमां आवाज लगा रहा है मनो वह उषाकाल होने के लिए सचेत कर रहा हो और रट रहा हो की जागो मनुष्य जागो,हे मानव चिरनिद्रा से जागो और जकड़े हुए आलस्य को त्याग कर अपने कार्य में लग जाओ जो तुम्हें सुख प्रदान करने वाला है | उगते हुए सूरज ने अपनी रश्मियों को चारो तरफ बिखेर दिया है | बाग़ बगीचे,खेत खलिहानों में रोशनी बिखरते ही हलचल मच गयी है |किसानों ने अपनी धीमी चाल को तेज कदमों के साथ बढ़ाना शुरू कर दिया है |मंद-मंद पवन जैसे गति पकड़ रही है वैसे-वैसे स्म्रतियों में खोये हुए जीवन की तीव्रता बढती जा रही है| ऊषा का आगमन खिलता हुआ सूरज दौड़ते हुए किसान धीमी गति के साथ अपनी चाल को बढाती हुई हवाएं मानो ये सभी उसे सन्देश देकर उसके गदगदाए हुए सीने को पुलकित कर रहे हैं |

थमा हुआ सफ़र फिर आगे बढ़ने की सोचता है,जमा हुआ खून गर्म होकर बहने लगता है काफी असमंजस और जद्दोजहद की स्थिति के बीच वो खुद को समाज से लड़ने के लिए प्रेरित करता है |

दुनियां मुझे बेसहारा,लाचार से कुछ भी कहती रहे और मैं हाथ पर हाथ धरे कायरों की भांति बैठा रहूँ | दौलत,बाप और खानदान के अलावा मेरे पास सब कुछ तो है|ईश्वर ने मुझे दो हाथ,दो पैर,दो आँखे,नाक,कान किसलिए दिए हैं खुद को गड्ढे में धकेलनें के लिए या उन्नति का मार्ग प्रशस्त करने के लिए, इस संसार में जिस का बाप न हो उसे जीवन जीने का अधिकार नहीं है| क्या उसे सिर्फ और सिर्फ रईसों के यहाँ नौकरी करने और उनकी चमचागिरी करने के लिए और उनके बारे में प्रशंसा के पुल बांधने के लिए भेजा गया|हा फिर मैं अनाथ भी तो नहीं हूँ,मैं अपनी बूढ़ी माँ और खुद का स्वतंत्रतापूर्वक मेहनत करके पेट नहीं भर सकता जीवन खुद में एक प्रयोगशाला है खुदा वास्ते यहाँ लोग आते है, प्रयोग करते हैं लेकिन सिद्ध करना भूल जाते है | सिद्धिकरण से पहले ही वे इस रंगमंच में अपना-अपना किरदार निभा कर चले जाते है |संसार रुपी गर्त में अन्धकाररुपी पहले डूबती नज़र आती है किन्तु बाद में तैरने लगती है लेकिन प्रकाश से भरी नौका तैरकर डूब जाती है | अज्ञान की तक्षशिला संसार को सींच देती है लेकिन ज्ञान का स्वरुप कहीं-कहीं अपनी छींटे मारता है |