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रिश्तों की टूटती हुई डोर | Personal Thoughts For Better Relation

आज के भागदौड़ भरे जीवन ने रिश्तों की अहमियत को खो दिया है चाहें वो माता पिता हों , भाई बहन हों , दोस्त हों , पडोसी हों किसी के पास एक दूसरे के लिए वक़्त नहीं है इंसान को आज के दौर में चारो तरफ पैसा ही पैसा नजर आ रहा है कैसे पैसा कमायें और कैसे शानदार जीवन यापन करें रिश्ते एक कोने में पड़े करवट ले रहे हैं |


rishton ki dor how to make relations better


दुनियां के सभी रिश्तों में सबसे ज्यादा मजबूत कहा जाने वाला रिश्ता है माँ-पिता और संतान का , लेकिन बड़े दुःख की बात है कि आज के समय में यही रिश्ता सागर की गर्त में पड़ा गोते खा रहा है | क्यों अपनी जन्मी हुई औलाद मजबूर कर रही है हर तरह से अपने माँ-बाप को , क्या असल जीवन में यही उनके जीनें की परीक्षा है |

माँ-पिता अपनी संतान को जिस निस्वार्थ भाव से प्रेम करते हैं वही रिश्ता बच्चों के लिए स्वार्थ परक बना हुआ है | माँ जिसने हमें नौ महीने गर्भ में रख कर भयंकर दर्द सहकर जन्म दिया है और बाप जिसने संतान के होते ही अपने शौकों को दफ़न कर औलाद का पालन पोषण किया | माँ-बाप जिन्होनें १० -१० बच्चो का पालन पोषण अभाव में, खुद चक्की चलाकर , आटा पीसकर , खुद भूखे रहकर कर लिया लेकिन वही १० बच्चे मिलकर अपने बूढ़े माँ-बाप को आज के समय में पैसा शोहरत और दौलत होते हुए भी भूखा मरनें पर विवश कर रहे हैं-ऐसा क्योँ |

हम बदल गए, दुनियां बदल गयी या फिर हमारे आस पास के वातावरण ने हमको ऐसा करने पर मजबूर कर दिया है | क्या कभी सोचा है या मन में विचार किया है कि हमारे परिवार के रिश्तों की डोर क्योँ इतनी कमजोर होती जा रही है, क्या हम अपने आस पास के वातावरण को देखकर वैसे ही बन जायंगे| यदि हम वास्तव में अपने रिश्तों में सुधार लाना चाहते हैं तो अपनी वाणी में मिठास और संयम बनाए रखें | 

हमारे माँ बाप या परिवार के अन्य सदस्यों को कोई चीज सबसे ज्यादा परेशान करती है तो वो है शब्द रुपी बाण | हम अपने शब्दों की कड़वाहट से परिवार के किसी भी सदस्य का मन आहत ना करें व उनकी दुखती हुई रगों को कभी ठेस न पहुचाने की कोशिश करें | हमारी हमारे परिवार के प्रति ये नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि हम उनकी छोटी या बड़ी हर जरूरत का ध्यान रखें ,उनसे विचार-विमर्श करें, उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखें तथा उन्हें मानसिक पीड़ा न दे | रिश्ते ही हमें कामयाबी की राह दिखाते हैं, रिश्तों से ही हमारा अस्तित्व है व रिश्ते ही हमें जाने-अनजाने में हुई गलतियों का अहसास कराते हैं |

रिश्तों में ग़लतफ़हमी कभी आड़े हाथों न आने दें ग़लतफ़हमियाँ ही हमारे बीच कड़वाहट पैदा करती हैं | हमारे अच्छे संबंधों को समाज की नजर न लगे ऐसा हमें हमेशा प्रयास करते रहना चाहिए , ऐसा करने से हमारे परिवार की खुशियाँ कई  गुना बढ़ जाती हैं |